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आधुनिक कृषि उपकरण

हरियाणा राज्य में कृषि सम्बंधित उपकरणों पर मिल रहा ८० % सब्सिडी, समय से करलें आवेदन

हरियाणा राज्य में कृषि सम्बंधित उपकरणों पर मिल रहा ८० % सब्सिडी, समय से करलें आवेदन

आजकल कृषि जगत में कृषि उपकरणों की अहम भूमिका है, आधुनिक कृषि यंत्रों से किसान की मेहनत के साथ साथ उनकी लागत में भी बेहद कमी आयी है। पहले किसान काफी परिश्रम करके फसल को उगाते थे। लेकिन आधुनिक विज्ञान की सहायता से नवीन कृषि उपकरणों की खोज हो रही है, जिससे किसानों के लिए उपयोगी कृषि यंत्रों की उपलब्धता तीव्रता से बढ़ी है। सरकार उपरोक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि सम्बंधित उपकरणों पर अनुदान देने की योजना लाती रहती है। इसी सन्दर्भ में फ़िलहाल हरियाणा सरकार किसानों के लिए ८० प्रतिशत तक का अनुदान देने का आह्वान कर चुकी है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मशीनें जैसे कि बुवाई, छिड़काव और कटाई से सम्बंधित उपकरण भी शामिल हैं।

हरियाणा सरकार ८० प्रतिशत तक क्यों दे रही है कृषि यंत्रों पर अनुदान ?

किसानों की आर्थिक हालत को देखते हुए सरकार ये भली भांति जानती है कि बहुतायत किसान आधुनिक उपकरणों को खरीदने के लिए सक्षम नहीं है। लेकिन पैदावार में वृद्धि और किसान की लागत में कमी के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों की अत्यंत आवश्यकता है। सरकार किसानों की समस्या को समझते हुए उनके लिए ८० प्रतिशत अनुदान प्रदान करने की इस मुहिम से, किसानों को आर्थिक तंगी से निजात दिलाना चाहती है। साथ ही हरियाणा राज्य को काफी उन्नत राज्य बनाने की राह पर चलना शुरू कर रही है, क्योंकि हरियाणा राज्य में अधिकतर लोग कृषि आश्रित होते हैं, इसलिए कृषि जगत को अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी भी बोला जाता है। किसान की उन्नति से ही राज्य और देश की उन्नती का मार्ग जाता है। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=LH7w59jnW-M[/embed]

कौन कौन से कृषि उपकरणों पर मिल रहा है अनुदान ?

हरियाणा राज्य सरकार द्वारा इन कृषि उपकरणों पर मिल रहा है अनुदान जिसमें, रोटावेटर, हे रेक मशीन, मोबाइल श्रेडर, रिप्पर बाइंडर, स्ट्रॉ बेलर, फ़र्टिलाइज़र ब्रॉडकास्टर, ट्रैक्टर ड्राइविंग पाउडर वीडर, लेसर लैंड लेवलर समेत ११ कृषि उपकरण सम्मिलित हैं। हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों के लिए कृषि विभाग के माध्यम से वेबसाइट https://agriharyana.gov.in/ पर जानकारी उपलब्ध कराई है, जहाँ किसान भाई आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए कृषि केंद्र की सहायता भी ले सकते हैं।

पूर्व में भी पराली के अवशेष से निजात के लिए उपकरण अनुदान देने के लिए मांगे थे आवेदन

हरियाणा राज्य सरकार ने पराली से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए जरूरी कृषि उपकरणों पर अनुदान देने की घोषणा की और आवेदन करने के लिए बोला था, जिससे पराली के अवशेष को नष्ट किया जा सके और दिल्ली समेत अन्य शहरों को भी प्रदुषण की मार से बचाया जा सके।
कृषि में लागत कम करें, मुनाफा खुद बढ़ेगा

कृषि में लागत कम करें, मुनाफा खुद बढ़ेगा

यूपी के किसान इन दिनों एक नए तरीका से काम कर रहे हैं। यह तरीका है नवीनतम तकनीकी का प्रयोग और प्राकृतिक खेती की तरफ झुकाव। अब जीरो बजट की खेती के तौर पर सरकार किसानों को हर संभव मदद कर रही है। किसानों को यह बात समझ में आ गई है, कि जब तक लागत कम नहीं होगा, उनका मुनाफा बढ़ने से रहा। उत्तर प्रदेश लगातार नए प्रयोग कर रहा है, यह प्रयोग खेती के क्षेत्र में भी दिख रहा है। यह किसानों के लिए लाभ का सौदा बनता जा रहा है। परंपरागत किसानी को कई किसानों ने बहुत पीछे छोड़ दिया है। अब वे खेती के नए प्रयोगों से गुजर रहे हैं, वे जीरो बजट खेती की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें यूपी की योगी सरकार उनकी मदद कर रही है। इन मामलों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद ही देख रहे हैं।


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मक्का, गेहूं, धान से फूल-सब्जी तक

एक दौर था, जब यूपी का किसान मक्का, गेहूं, धान की खेती पर ही पूरी तरह निर्भर था। अचरज की बात है, कि अब इन किसानों ने इन फसलों के साथ ही सब्जियों की भी खेती शुरू कर दी है। आचार्य देवव्रत के जीरो बजट खेती का फार्मूला इन किसानों को अब समझ में आ गया है। यही कारण है, कि अब किसान अपने घर के आगे-पीछे भी फूल-फल की खेती करने से हिचक नहीं रहे हैं।

जोर प्राकृतिक खेती पर

बीते दिनों यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि खेती में अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग व प्राकृतिक खेती आज की जरूरत है। पुराने ढर्रे पर काम करने से कुछ खास हासिल होने वाला नहीं। अगर कुछ बढ़िया करना है, तो नई तकनीकी को आजमाना पड़ेगा, पूरी दुनिया में खेती के क्षेत्र में नए प्रयोग हो रहे हैं। अगर यूपी इनमें पिछड़ा तो पिछड़ता ही चला जाएगा।

गो आधारित खेती

योगी ने सुझाव दिया कि क्यों न गौ आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए यह जीरो बजट खेती है। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उनका मानना था, कि प्राकृतिक खेती में तकनीकी से उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। हां, इसके लिए थोड़ी जागरूकता व सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर हम ऐसा कर लेते हैं, तो प्राकृतिक खेती के जरिये कम लागत में अधिक उत्पादकता प्राप्त कर किसान भाई अपनी आमदनी अच्छी-खासी बढ़ा सकते हैं। परंपरागत खेती को परंपरागत तरीके से करने में कोई लाभ नहीं है, अगर परंपरागत खेती को नई तकनीकी के इस्तेमाल के साथ किया जाए तो नतीजे शानदार आएंगे। योगी का कहना था, कि आधुनिक तरीके से खेती करने के साथ किसानों को बाजार की मांग और कृषि जलवायु क्षेत्र की अनुकूलता के आधार पर बागवानी, सब्जी व सह फसली खेती की ओर भी अग्रसर होना होगा। इससे उनकी अधिक से अधिक आमदनी हो सकेगी।

खेती कमाई का बड़ा साधन

आपको बता दें कि यूपी, आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य तो है ही, खेती-किसानी ही यहां की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा जरिया भी है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि देश की सबसे अच्छी उर्वर भूमि और सबसे अच्छा जल संसाधन उत्तर प्रदेश में ही है। यहां की भूमि की उर्वरकता व जल संसाधन की ही देन है, कि देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 12 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद देश के खाद्यान्न उत्पादन में अकेले उत्तर प्रदेश का योगदान 20 प्रतिशत का है।


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तीन गुना तक बढ़ सकता है प्रदेश का कृषि उत्पादन

यूपी के मुख्यमंत्री मानते हैं, कि प्रदेश का कृषि उत्पादन अभी और तीन गुणा बढ़ सकता है। इसके लिए हमें बेहतर किस्म के बीज की जरूरत तो पड़ेगी ही इसके साथ ही आधुनिक कृषि उपकरणों की भी जरूरत पड़ेगी। हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि खेती की लागत कम हो और मुनाफा बढ़े। यूपी सरकार इसके लिए व्यापक अभियान चला भी रही है।